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*Good Morning Friends

आज कल की भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम सभी शायद सुकून और मानसिक शान्ति को बहुत पीछे छोड़ आये हैं!!

हर दिन एक नयी चुनौती.. और फिर बही व्यस्त जिंदगी..

न अपने परिवार वालों को वक्त दे पा रहे हैं.. न दोस्तों को..

तब फिर कैंसे सबको ख़ुश रख़ा जाये..??

बहुत आसान से उपाय हैं..

१. अपनी दिनचर्या और काम को व्यवस्थित रखें!

२. मानसिक दबाब में कोई कार्य ना करें.!

३. हर छोटी बड़ी समस्या या ख़ुशी को अपनों से साझा (share) करें..!!

४. अपनी निजी जिंदगी में ध्यान और अध्यात्म को लायें.!!

५. हर परिस्थिती में खुश रहें!!

फ़िर देखिये.. कैंसे आपकी जिंदगी ख़ुशमुमा होती है.. 👌 😊 👍

*धन्यवाद! दोस्तों!*

आशा करता हूँ.. कि मेरा यह लेख. आपको पसँद आया होगा..

आगे और भी बेहतरीन लेख. आप पढ़ेंगे..!!

आपकी प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा..

शुप्रभात.. शुभदिन..

📝 राहुल पाण्डे्य.. 📝

📞 📱 whatsapp: 9770064895post

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🌹 ⛺ The Devotion and fame of Lord Hanuman.. ⛺ 🌹

The Devotion and Fame of Hanuman!!

शुभ मुहूर्त में प्रभु श्रीराम का राजतिलक किया गया । अयोध्या के राजसिंहासन पर प्रभु श्रीराम, सीता जी और उनके पास खड़े लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न को देखकर सभी अयोध्यावासी और प्रभु के साथ आए अतिथि आनंद और हर्ष से झूम उठे ।

उन्हें तरह-तरह के बहुमूल्य उपहार प्राप्त हुए । ऋषि-महर्षियों ने उन्हें आशीर्वाद दिया और नगरवासियों ने उनके लिए मगल गान किया । पूरी अयोध्या इस अवसर पर भव्य रूप से सजाई गई थी और सभी को राज्य की ओर से उपहार वितरित किए गए थे ।

अंत में प्रभु ने अपने अत्यत निकट सभी अतिथियों का सम्मान किया । युवराज अंगद, लंकेश विभीषण, वानरराज सुग्रीव, ऋक्षराज जाम्बवत, निषादराज गुह, नल, नील आदि को विविध बहुमूल्य उपहार प्रदान किए गए । मुनियों और ब्राह्मणों को भरपूर दान दिया और उन्हें प्रत्येक रीति से प्रसन्न किया । उसी समयप्रभु श्रीराम ने महारानी सीता के गले में एक बहुमूल्य मुक्ताहार पहनाया ।

उस समय सीता जी ने देखा कि प्रभु ने सभी को कुछ न कुछ दिया पर पवनपुत्र हनुमान जी को अभी तक कुछ नहीं दिया । हनुमान जी तो चुपचाप प्रभु के श्री चरणों में बैठे उन्हें ही देख रहे थे । उन्होंने एक बार भी सिर उठाकर नहीं देखा था कि प्रभु किसको क्या दे रहे हैं ।

तभी सीता जी ने अपने गले से प्रभु का दिया मुक्ताहार निकाला और प्रभु की ओर देखा । प्रभु ने उनका आशय समझकर कहा, ”सीते तुम जिसे चाहो, इसे दे दो ।” अपने स्वामी का आदेश पाते ही सीता जी ने वह मुक्ताहार पवन पुत्र हनुमान जी को दे दिया ।

उस बहुमूल्य हार के गले में पड़ते ही हनुमान जी के कठ की शोभा बढ़ गई । हनुमान जी ने सोचा कि माता सीता ने यह हार उन्हें प्रदान किया है तो इसमें अवश्य ही कुछ विशेषता होगी । ऐसा सोचकर हनुमान जी ने उस मुक्ताहार को अपने गले से उतारा और उसे ध्यान से देखना प्रारंभ कर दिया । परंतु उसमें उन्हें कोई विशेषता दिखाई नहीं दी ।

उन्होंने सोचा कि संभवत इन मुक्ताओं के भीतर प्रभु विराजमान हों । ऐसा सोचकर उन्होंने मोती के दानों को अपने मुख में डालकर दांतों से तोड़-तोड़कर देखना शुरू कर दिया । जब उनके भीतर उन्हें प्रभु श्रीराम और माता सीता की छवि दिखाई नहीं दी तो उन्होंने उन्हें फेंकना शुरू कर दिया ।

यह दृश्य देखकर सभी आश्चर्य से हनुमान जी की ओर देखने लगे कि ये क्या कर रहे हैं ? इतने बहुमूल्य मुक्ताहार के दानों को वे अपने दांतों से तोड़कर देखते हैं और फेंक देते हैं । सभी सभासदों का धैर्य जाता रहा । लोग कानाफूसी करने लगे, ”बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद ! इतना बहुमूल्य उपहार है ये, पर ये हनुमान जी तो इसे तोड़े डाल रहे हैं ।”

तब विभीषण जी ने अधीर होकर हनुमान जी से पूछा, ”हे पवनपुत्र ! आप यह क्या कर रहे हैं ? इतने बहुमूल्य मुक्ताहार को आपने नष्ट कर डाला ।” हनुमान जी बोले, ”लंकेश्वर ! इस हार का मेरे लिए भला क्या मोल है ? जबकि मेरे प्रभु श्रीराम और माता सीता की छवि इन दानों में है ही नहीं । मैं इन दानों को तोड़कर यह देख रहा हूँ कि क्या इनके भीतर इनकी छवि विद्यमान है ।

पर इनके अंदर भी वह छवि नहीं है । इसलिए मेरे लिए ये व्यर्थ हैं । तभी मैं इन्हें फेंक रहा हूं ।” हनुमान की बात सुनकर विभीषण क्षुब्ध हो उठे और बोले, ”अगर इन अमूल्य मोतियों में प्रभु की झांकी नहीं है तो क्या आपके हृदय में है ?”

हनुमान जी ने तत्काल उत्तर दिया, ”लंकेश्वर ! मेरे प्रभु निश्चय ही मेरे हृदय में विराजते हैं । यदि वे नहीं हैं, तो इस शरीर का भी कोई मूल्य नहीं है । मैं इसे तत्काल नष्ट कर दूंगा ।” ”ऐसी बात है तो फिर हमें प्रभु के दर्शन अपने हृदय में कराओ पवनपुत्र !” दरबार में चारों ओर से आवाजें आनी प्रारंभ हो गई ।

उनकी बातें सुनकर हनुमान जी ने अपने दोनों हाथों के नाखूनों से अपना सीना चीर दिया और उच्च स्वर से कहा, ”जय श्रीराम !” घोर आश्चर्य के साथ सारी सभा ने आखें फाड़-फाड़कर देखा कि प्रभु श्रीराम सीता जी सहित उनके हृदय में सिंहासन पर विराजमान हैं । लंकेश्वर विभीषण घोर ग्लानि में डूब गए । उसी समय पूरी सभा ‘जय श्रीराम’ ‘जय रामभक्त हनुमान’ के नारों से गूंज उठी ।

भगवान श्रीराम तत्काल अपने सिंहासन से उतरे और उन्होंने आगे बढ्‌कर हनुमान जी को अपने हृदय से लगा लिया । उनकी आखों से प्रेमाश्रु उमड़कर हनुमान जी के शीश को भिगोने लगे । वे बोले, ”वत्स हनुमान ! तुमसे बढ्‌कर इस संसार में मेरा कोई अन्य भक्त नहीं है । तुम मुझे भरत, शत्रुप्न और लक्ष्मण से भी अधिक प्रिय हो ।”

प्रभु श्रीराम के कर स्पर्श से हनुमान जी का शरीर पहले जैसा ही स्वस्थ और सुदृढ़ हो गया । पूरी राजसभा ने हृदय से स्वीकार किया कि हनुमान जी श्रीराम और महारानी सीता के अनन्य भक्त हैं । वे पूरी तरह से राममय हैं ।

तदुपरांत कुछ दिन अयोध्या निवास करके प्रभु श्रीराम की आज्ञा से लंकेश्वर विभीषण, वानरराज सुग्रीव, युवराज अंगद, ऋक्षराज जाम्बवंत, नल, नील, निषादराज गुह व अन्य अतिथिगण अपने-अपने स्थान को चले गए । वानरराज सुग्रीव और उनकी महारानियां तथा अन्य वानर, लंकेश्वर विभीषण के साथ ही किष्किंधा नगरी के लिए पुष्पक विमान से गए । 🌹 ⛺ ~जय श्री राम~ ⛺ 🌹

⛺ 🌹 ✒ रूद्राष्टाध्याय रूद्र महिमा ✒ 🌹 ⛺

वायुपुराण में लिखा है–

यश्च सागरपर्यन्तां सशैलवनकाननाम्।

सर्वान्नात्मगुणोपेतां सुवृक्षजलशोभिताम्।।

दद्यात् कांचनसंयुक्तां भूमिं चौषधिसंयुताम्।

तस्मादप्यधिकं तस्य सकृद्रुद्रजपाद्भवेत्।।

यश्च रुद्रांजपेन्नित्यं ध्यायमानो महेश्वरम्।

स तेनैव च देहेन रुद्र: संजायते ध्रुवम्।।

अर्थ: जो व्यक्ति समुद्रपर्यन्त, वन, पर्वत, जल एवं वृक्षों से युक्त तथा श्रेष्ठ गुणों से युक्त ऐसी पृथ्वी का दान करता है, जो धनधान्य, सुवर्ण और औषधियों से युक्त है, उससे भी अधिक पुण्य एक बार के रुद्री[4]जप एवं रुद्राभिषेक का है। इसलिये जो भगवान शिव का ध्यान करके रुद्री का पाठ करता है, वह उसी देह से निश्चित ही रुद्ररूप हो जाता है, इसमें संदेह नहीं है।

इस प्रकार साधन पूजन की दृष्टि से सुद्राष्टाध्यायी का विशेष महत्व है।

प्राय: कुछ लोगों मे यह धारणा होती है कि मूलरूप से वेद के सुक्त आदि पुण्यदायक होते हैं अत: इन मन्त्रों का केवल पाठ और सुनना मात्र ही आवश्यक है। वेद तथा वेद के अर्थ तथा उसके गंभीर तत्वों से विद्वान प्राय: अनभिज्ञ हैं। वास्तव में यह सोंच गलत है, विद्वान वेद और वान से मिलकर बना है, तो वेद के विद्या को जो जाने वही विद्वान है, इसके संदर्भ में उनको जानकारी होना आवश्यक है। प्राचीन ग्रंथों में भी वैदिक तत्वो की महिमा का वर्णन है।

निरुक्तकार कहते हैं कि जो वेद पढ़कर उसका अर्थ नहीं जानता वह भार वाही पशु के तुल्य है अथवा निर्जन वन के सुमधुर उस रसाल वृक्ष के समान है जो न स्वयं उस अमृत रस का आस्वादन करता है और न किसी अन्य को ही देता है। अत: वेदमंत्रों का ज्ञान अतिकल्याणकारी होता है–

स्थाणुरयं भारहार: किलाभूदधीत्य वेदं न विजानाति योऽर्थम्। योऽर्थज्ञ इत् सकलं भद्रमश्नुते नाकमेति ज्ञानविधूतपप्मा।।

अत: रुद्राष्टाध्यायी के अभाव में शिवपूजन की कल्पना तक असंभव है।

🌹 💖 🎼 🎧 A Beatiful song by The Great Mohd. Rafi Sahaab.. 🎧 🎼 💖 🌹

📝 💖 🎼 “क्या हुआ तेरा वादा .. वो क़सम वो इरादा.. भूलेगा दिल जिस दिन तुम्हें.. वो दिन ज़िंदगी का आखरी दिन होगा..

क्या हुआ तेरा वादा.. वो क़सम वो इरादा.. याद है मुझको तुमे कहा था.. तुमसे नहीं रुठेंगे कभी… दिल की तरह से हाथ मिले हैं… कैसे भला छूटेंगे कभी..

तेरी बाँहों में बीती हर शाम.. बेवफा ये भी क्या याद नहीं.. क्या हुआ तेरा वादा.. वो क़सम वो इरादा… भूलेगा दिल जिस दिन तुम्हें.. वो दिन ज़िंदगी का आखरी दिन होगा.. क्या हुआ तेरा वादा.. वो क़सम वो इरादा..

ओ कहने वाले मुझको फरेबी.. कौन फरेबी है ये बता.. ओ जिसने ग़म लिया प्यार की खातिर… या जिसने प्यार को बेच दिया.. नशा दौलत का ऐसा भी क्या.. के तुझे कुछ भी याद नहीं..

क्या हुआ तेरा वादा.. वो क़सम वो इरादा… भूलेगा दिल जिस दिन तुम्हें.. वो दिन ज़िंदगी का आखरी दिन होगा…

क्या हुआ तेरा वादा..

वो क़सम.. वो इरादा.. 🎼 💖 🌹 📝

Thanks.. Friends.. Hope you like it.. 👌 👍

🌹 🚩 “हनुमान जयंती: ३१ मार्च २०१८” 🚩 🌹

🌹 🚩 “हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनायें..

जय श्री राम.. जय जय महावीर हनुमान..” 🚩 🌹

📝 🚩 अष्टसिद्धि और नौ निधियों के प्रदाता हनुमान जी का जन्मोत्सव शनिवार को है। नौ साल बाद शनिवार के दिन हनुमान जयंती पड़ रही है। इसके साथ ही ज्योतिषी हिसाब से कई मंगलकारी योग बन रहे हैं। शनिवार को ही मंगल और शनि धनु राशि में हैं। शनि और मंगल का विशेष द्विग्रही योग बन रहा है। हस्त नक्षत्र भी है। काफी समय बाद मार्च के माह में ही हनुमान जयंती पड़ रही है। चूंकि इस नवसंवत्सर के राजा सूर्य और मंत्री शनि हैं, इसलिए भी हनुमान जयंती खास है। ग्रहों की पीड़ा शांत करने का विशेष अवसर है।”

“प्रात: 4 बजे हुआ था हनुमान जी का जन्म
हनुमान जयंती- चैत्र मास की पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त यानी प्रात: 4 बजे अंजनी के गर्भ से हनुमान जी का जन्म हुआ था। इनके पिता हैं वानरराज केसरी। इसलिए, इनको केसरीनंदन भी कहते हैं। रामभक्त के रूप में हनुमानजी को तो सभी जानते हैं। लेकिन उनकी अन्य भी विशेषताएं हैं। वह समस्त वेदों के ज्ञाता, नाना पुराण आख्याता, ज्योतिषी, संगीतज्ञ, वानरराज, यंत्र-मंत्र और तँत्र के सिद्धहस्त होने के साथ-साथ संकटमोचन भी हैं। अकेले उनको ही यह वरदान प्राप्त है कि वह समस्त संकट हर सकते हैं। सर्व कार्य सिद्ध कर सकते हैं। वह सूर्य के शिष्य हैं। सूर्य भगवान का जप-तप-ध्यान करने से ही उनको असाधारण सिद्धियां और निधियां प्राप्त हुईं। अणिमा,( आकार बढ़ा सकते हैं) लघिमा ( आकार छोटा कर सकते हैं) गरिमा ( भारी कर सकते हैं), प्राप्ति ( कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं), प्राकाम्य ( सर्व प्रदाता), महिमा( यश-कीर्ति), ईशित्व (ईशरत्व) और वशित्व( वशीकरण) का अधिकार केवल हनुमानजी को ही प्राप्त है। तभी उनको कहा गया-अष्ट सिद्धि-नौ निधियों के दाता।”

🚩 📝 📠 📡 लेख: राहुल पान्डेय 📡 📠 📝🚩

🌹 📝 Love: Balancing & Management.. 📝 🌹

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“Why are you now afraid of the name of love? Girls are probably afraid of getting cheated in love or because of mental depression in studies, it is happening.. love.. Love is not a crime, but a bad person Love is to be lost.

The heart is very delicate. It can easily break a wrong person … needs to be done only with caution and wisely … you study between love And can not bring love in the middle of studies. Yes, you can be happy by making balances between the two …

If someone does not love you or do not like it, then do not think that there is any shortage in you … you yourself You can love me … to be happy and love is all right … if you think that .. I can not love anyone .. then this will be wrong …

because you do not have control over yourself You can do … love will remain for you … time of So much so .. do notbe afraid .. be with love .. be happy..” 📝

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🌹 📝 Girls & Boys In Modern India.. 📝 🌹

Do Respect of Girls… It’s become Respects of india.. ~Writer Rahul pandey..~

🌹 📝 The girls have become quite clearer in today’s time..

Now they do not consider themselves less than boys.. It is a good thing.. Both should be of equal status.. Whether the boy or the girl, the use of the freedom from the family and the family.. If not, then it is good.. Otherwise it can have serious consequences.. Do not be indecisive to the girls.. otherwise you will be entitled to punishment…

do not lose your honor in front of anyone…”

📝 I hope you like & share this article.. Thank’s to read this blog.. Good morning.. Friends.. God bless you..

📲 WhatsApp: +919770064895 📲

~Writer Rahul Pandey~ 📝

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🌹 ✒ युवा दिवस ✒ 🌹

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✍🏻 🕊 *”समृद्धशाली भारत और अखिल विश्व के युवाओं के प्रेरणा स्रोत महान संत और दार्शनिक स्वामी विवेकानंद जी को समर्पित मेरी लिखी कुछ पंक्तियाँ..”* ✍🏻

✒ *_सकल जगत में फैला था.. जब मानवता का अंधियारा..*


*लेकर आये तब धरती पर.. नवचेतना का उजियारा..*


*जब घटते प्रेम-विश्व बंधुत्व को.. सकल हृदय में उपजाया..*


*जब हुआ अस्त रवि ज्ञान का.. तब वेदांत-योग की किरणों से.. ज्ञान सूर्य का उदय किया..*


*जीवन-यौवन सर्वस्व समर्पण कर मानवता को..*

*भारत को विश्वगुरू का मान दिया..*


*फिर देकर हमें सुदृढ़ युवा भारत..*

*भारत माँ का आँचल थाम लिया..* ✍🏻


*मेरे सभी मित्र-बंधुओं को युवा दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.. एवं महान दार्शनिक संत स्वामी विवेकानंद जी को शत-शत नमन..*

✒ *_राहुल पान्डेय_* ✒ 🌹 🕊✍🏻

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